रविवार, 30 अगस्त 2009


दुनिया मेरी

छोटी सी है

कई मायनों में

फिर भी

लोगों से बड़ी ........

नहीं निर्धारित होती

अपनों की सीमा

यहाँ रिश्तों से

वह हर कोई

अपना है यहाँ

नहीं लगता जो पराया

खुश रहने के मौके

अपेक्षाकृत ज्यादा है यहाँ

खुशियों के मायने

निहित जो राते हैं

अपनी हार

और दूसरों की जीत में ।

नहीं झरते

आंसू यहाँ

ख़ुद के दर्द से

बहती रहती है

अश्रुओं की अविरल धारा

देखकर मायूसी

औरों की आंखों की

नहीं होता जीवन का

कोई एक ध्येय यहाँ

पूरा होने पर

एक के

शुरू हो जाती है जद्दोजहद

दूसरे के लिए

इसलिए छोटा होकर भी

बड़ा लगता है

जीवन यहाँ .......

आरती "आस्था "

रविवार, 9 अगस्त 2009

मेरी diary से

आरती* आस्था* कानपूर

३१.०७.२००९
जिन्दगी चाहे कितनी मुस्किल क्यों न हो उसे जीना ही पड़ता है।


०३.०८.२००९
हम बहुत बार चुप रहते हैं बहुत कुछ बोलने के लिए ........ बहुत बार चुप्पी के माध्यम से और बहुत बार भविष्य में एकमुश्त बोलने के लिए.