
आरती आस्था
हमने कहा
हम हो न हो
लेकिन हर ख़ुशी हो वहां
जहाँ तुम रहो
तुमने कहा
जहाँ तुम नहीं होगी
वहां मै खुश कैसे रह सकता हूँ
हमने कहा
जहाँ हर चीज़ हो सिवाय मेरे
वहां भी नहीं!
तुमने कहा
जहाँ तुम्हारे सिवाय कुछ भी न हो
वहां भी l
१८.०२.२००९
खामोशी की आवाज़ तो बहुत लोग सुन लेते है लेकिन उसके सही-सही निहितार्थ शायद ही कोई समझ पाता है l
२४.०२.२००९
किसी चीज की कीमत इससे नहीं तय होती है की बेचने वाला उसे किस कीमत में बेच रहा है बल्कि इससे तय होती है कि खरीदने वाला उसे किस कीमत में खरीद रहा है l

जैसे तालों को खोलने के लिए
होती हैं चाभियाँ
काश वैसे ही होती चाभियाँ
परत-दर-परत चेहरों को खोलने के लिए भी
तब सहज होती
अपने-पराये की पहचान
तब न कदम-कदम पर
छले जाते हम
और न दोष देते किस्मत को .............|