गुरुवार, 18 फ़रवरी 2010

अपनी खामोशियों की वजह से मे बहुत जगह हारी हूँ ...मैंने बहुत कुछ खोया है ...लोग कहते हैं -बोलने के बाद तो इंसान को बहुत बार पछताना पड़ता है,लेकिन चुप रहने के बाद नहीं जबकि मै पछता रही हूँ अपने चुप रहने पर ...चुप रहकर सबकुछ सहने पर ...लेकिन फिर भी मै अपने अन्दर फैली ख़ामोशी से निकल नहीं पा रही हूँ ...डर लगता है कही नए रिश्ते भी ख़ामोशी की भेट न चढ़ जाएँ ....

शनिवार, 13 फ़रवरी 2010

सच में सबकुछ पहले से तय होता है ...हमारा हर आंसू ,हमारी हर खिलखिलाहट पहले से तय की जा चुकी होती है । हमारे साथ घटी हर छोटी -बड़ी चीज का कोई मतलब होता है ...इस जिन्दगी में कुछ भी बेमायने नहीं होता ...कुछ भी बेमकसद नहीं होता ...

बुधवार, 6 जनवरी 2010

बहुत हो गया

बहुत हो गया / तुम्हारी उपेक्षा पर/मेरा चुप रहना /और छुपा जाना तुम्हारा /अपनी भावनाओं को । /बहुत हो गया /जो नहीं हूँ /खुद को दिखाना /और ख्वाहिश करना /पाने को तुम्हारा प्यार /शर्तों पर तुम्हारी । /बहुत हो गया /naitrogen बम की तरह /अन्दर-अन्दर /मेरा टूटना-बिखरना /और शांत नजर आना /बाहर से ।
परिंदे एक आशियाँ टूटने पर जितनी सहजता से दूसरा आशियाँ बनाने में जुट जाते है ,इन्सान उतनी सहजता से तो आशियाँ में रहना भी कभी नहीं सीख पाता ।
जीवन में बहुत से आश्चर्य हमने-आपने देखे होंगे लेकिन अगर कभी गंभीरता पूर्वक सोचेंगे तो पाएंगे-जीवन से बड़ा दूसरा कोई आश्चर्य नहीं ।
जीवन में अगर ख़ुशी चाहते हैं आप तो सतहीपन में जीना शुरू कर दीजिये ...हर तरफ खुशियाँ ही खुशियाँ नजर आएँगी ..आप उन्हें छू पाएंगे ...जी पाएंगे ...लेकिन प्लीज़ भूलकर भी गहराई की ओर रुख मत कीजियेगा ...
कभी-कभी हम अपने आपको बिलकुल असहाय महसूस करते है ;अपनों के न होने के कारण नहीं बल्कि उनके अपनों जैसा न होने के कारण।