गुरुवार, 24 दिसंबर 2009

मेरे अपनों ने मुझे इस काबिल नहीं बनने दिया की मै कोई लड़ाई लड़ सकू ।शायद एहसास था उन्हें की मेरी सबसे पहली और बड़ी लड़ाई उन्ही से होनी है ----उनके ही खिलाफ है ।
जिन्दगी को अगर चेतन होकर जिया जाये तो हर पल एक कविता बनती है। लेकिन जिन्दगी अपने आप में जितनी बड़ी कविता है,उतनी बड़ी कविता आप पूरी जिन्दगी नहीं लिख सकते ।
जुडाव शब्द कम अर्थ रूप में मुझसे ज्यादा जुड़ा है ।

मोह के साथ जीना मुश्किल होता है लेकिन मोह के बगैर भी जीना आसान नहीं होता ।

हम किसी भी इंसान को अधिकतम तो जान सकते हैं पर पूरी तरह नहीं।

रविवार, 13 सितंबर 2009

भड़ास blog: ग़लतफ़हमी में#links

भड़ास blog: ग़लतफ़हमी में#links

गलतफहमी में

आरती "आस्था"
हम मिलते हैं....
बात करते हैं.....
लेकिन नहीं होता
जब कभी
हमारे पास
बोलने के लिए कुछ
(हालांकि कमी नहीं है हमारे पास शब्द भावनाओं की)
और पसरने लगती है खामोशी
हमारे दरम्यान
तो भागने लगते हैं हम
एक-दूसरे से
भागना जो नहीं चाहते
एहसास में भी
और खामोशी
एहसास कराती है
एक दूरी का
हमारे बीच......
वास्तव में बैठ गया है
एक डर हममें
कुंडली मारकर
जो न बोलने देता है
और न ही
रहने देता है चुप....
कि कहीं खो न दें हम
किसी गलतफहमी में
एक-दूसरे को।